सावित्री बाई फूले की जयंती आमला में धूमधाम से मनाई

सावित्री बाई फूले की जयंती आमला में धूमधाम से मनाई




दैनिक ताप्ती अमृत 

आमला। बस स्टैंड आमला में शनिवार को सावित्री बाई फुले की नगर पालिका के तत्वाधान में फुले की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर मंच के अनुयायियों ने सावित्री बाई फुले के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उन्हें नमन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने अनेक सामाजिक बहिष्कार और कठिनाइयों को सहन करते हुए बालिकाओं की शिक्षा को अनिवार्य माना और उनके लिए विद्यालय की स्थापना की। उस समय समाज द्वारा उन्हें अनेक प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन वे अपने दृढ़ निश्चय से कभी पीछे नहीं हटीं।

  पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनोज मालवे ने कहा कि आजादी से पहले भारत में महिलाओं के साथ भेदभाव था और उनकी स्थिति दयनीय थी। बचपन में सावित्रीबाई फुले को स्कूल जाने से रोका गया था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने जीवन को महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित कर दिया। समाज सेवक राजेंद्र उपाध्याय ने कहा कि बस स्टैंड पर सावित्री बाई फुले की मूर्ति की स्थापना की जाना चाहिए क्योंकि सावित्रीबाई फुले का पूरा जीवन वंचित खासकर महिलाओं व दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली क्षेत्र की महिलाओं का सम्मान एवं प्रशस्ति पत्र देकर उनका सम्मान किया गया कार्यक्रम के सूत्रधार चंद्रशेखर पंडोले ने कहा कि सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनका जीवन संघर्षों से भरा हुआ था और वह भारत की पहली महिला शिक्षिका और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह अविस्मरणीय है।


 मंच संचालन शिव प्रसाद गुजरे ने एवं अंत में आभार व्यक्त नगर पालिका प्रभारी प्रकाश देशमुख ने किया कार्यक्रम में उपस्थित पार्षद ओमवती विश्वकर्मा पद्मिनी भूमरकर रोहित हरोड़े व्यापारी मंडल अध्यक्ष संजय साहू , समाज सेवक मुन्ना मालवी मनोज विश्वकर्मा मेहरा समाज के ब्लॉक अध्यक्ष अजय बचले सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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