रामलीला में अंगद संवाद ने रावन की भरी सभा में घमंड को तोड़ा
विकास सोनी
झल्लार ।( ताप्ती अमृत)नवयुवक मंडल ग्राम आमला में चल रही रामलीला के आठवें दिन गुरुवार की रात्रि में अंगद-रावण संवाद का पहला दर्शन देखते ही श्रद्धालु भावपूर्ण प्रसन्न हो गए। माता सीता की खोज के लिए लंका में अंगद ने भरी सभा में रावण की बेज्जती की। अंगद ने अपनी कुशल दूत का परिचय देते हुए। अपनी बातों से रावण की बखिया उखाड़ दी। रावण क्रोधित होकर अपने आप को शक्तिशाली बताते हुए कहा वानर मूर्ख तुम जानते नहीं मैं कौन हूं। अंगद ने रावण का घमंड एवं शक्तियों को तोड़ते हुए कहा तुम श्री राम के चरण में चले जाओ यही तुम्हारी भलाई है। हनुमान ने तुम्हारी सोने की लंका पल भर में जला दी। फिर भी तुम अपने आप को भगवान समझते हो श्री राम के चरण में चले जाओ इसी में तुम्हारी भलाई है। रावण को अपनी घमंड शक्तियों पर इतना घमंड था कि वह सभी देवताओं से खुद को श्रेष्ठ समझता था। रावन की सभा में अंगद ने जमाया पैर कोई नहीं हीला पाए अंगद का पैर सीता का हरण कर लंका लाने पर उसकी पत्नी मंदोदरी ने भी उसे बार बार समझाने कि कोशिश की श्री राम से बैर न करें लेकिन रावण खुद पर अभिमान था।इस कारण में श्री राम को सामान्य इंसान समझ रहा था।रावण को बात-बात पर गुस्सा आ जाता है। रण भूमि में मेघनाथ लक्ष्मण युद्ध चला। लक्ष्मण को लगी शक्ति। लक्ष्मण को शक्ति लगते ही अंगद हनुमान राम हुए उदास लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए जामवंत के कहने पर वैद्यराज ने बताया कि लक्ष्मण को केवल संजीवनी बूटी से ही बचाया जा सकता है। हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय गए। औषधि को पहचान नहीं पाने के कारण हनुमान जी ने पूरा पर्वत उठाकर ला लिया। हनुमान जीने लाई संजीवनी बूटी के प्रयोग से लक्ष्मण जीवित हो गया।
