जीवन और मृत्यु के बीच झूलता नन्हा अभय, सामूहिक प्रयास से मिला जीवनदायी सहारा
एसडीएम के संवेदनशील संवाद के बाद परिजनों ने अभय को एनआरसी में भर्ती कराने पर दी सहमति
बैतूल।( ताप्ती अमृत ) जिले के भैंसदेही ब्लॉक में एक बार फिर सरकारी तंत्र और सामाजिक जिम्मेदारी का अद्भुत उदाहरण सामने आया है। हाल ही में दस्तक अभियान के तहत आयोजित पोषण क्लिनिक में जब 1.1 वर्ष के अभय को देखा गया, तो स्वास्थ्य कर्मियों के होश उड़ गए। अभय का वजन मात्र 4 किलोग्राम था, जो उम्र के लिहाज से बेहद कम है और गंभीर कुपोषित है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक थी, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती थी। पोषण क्लिनिक में आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम द्वारा जब अभय की स्थिति को पहचाना गया, तो उन्होंने तुरंत परिवार को एनआरसी में भर्ती करवाने के लिए प्रेरित किया। हालांकि परिजनों ने कई प्रयासों के बावजूद सहयोग नहीं किया। सामाजिक मान्यताएं, जानकारी की कमी और अस्पतालों को लेकर लोगों के मन में व्याप्त डर इस असहयोग का मुख्य कारण बना। जब स्थानीय स्तर पर समझाइश से बात नहीं बनी, तो मामले को एसडीएम भैंसदेही तक पहुंचाया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, और अंतरा फाउंडेशन की संयुक्त टीम ने मिलकर परिजनों से संपर्क साधा। एसडीएम के मार्गदर्शन और संवेदनशील संवाद के बाद अंततः परिजनों ने अभय को एनआरसी में भर्ती कराने पर सहमति दी। इसके बाद अभय को तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र एनआरसी में भर्ती कर लिया गया है, जहां उसे जीवन रक्षक उपचार, चिकित्सकीय देखरेख और पोषण संबंधी विशेष देखभाल मिल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि समुचित देखभाल से अभय की स्थिति में सुधार होगा और वह जल्द ही सामान्य विकास की ओर लौटेगा
