राम भक्त ले चला रे राम की निशानी

 राम भक्त ले चला रे राम की निशानी







 विकास सोनी ( ताप्ती अमृत)झल्लार-नवयुवक रामलीला मंडल ग्राम आमला के तट प्रधान में चल रही रामलीला मंचन के पांचवें दिन सोमवार की शाम भावपूर्ण प्रसंग में दशकों को रामायण काल में पहुंचा दिया। मंचन की शुरुआत में राम भक्त ले चला रे राम की निशानी  राजा दशरथ राम की याद करते-करते श्रवण के मां-बाप के श्राप के बाद सभी को बताते हैं। कि आप भी हमारी तरह पुत्र के वियोग में प्राण त्याग होंगे। राजा दशरथ राम-राम करते प्राण त्याग देते हैं। गुरु वशिष्ठ ननिहाल से भरत को वापस बुलाते हैं‌।

भरत अयोध्या जाकर माता केकई से मिलने जाते हैं। जहां की केकई भरत को सारी बात बताई जाती है। जिससे भरत नाराज होकर बोलते हैं।कि आप मेरी माता नहीं हो सकती आपने पूरे राज पाठ का सत्यानाश कर दिया है।आज से मैं आपके पास कभी नहीं आऊंगा। फिर भरत माता कौशल्या से मिलने जाते हैं। और कहते हैं की माता इसमें मेरा कोई कसुर नहीं मुझे राजपाट से कोई लेना देना नहीं। इसके बाद माता कौशल्या से आज्ञा लेकर वन जाकर भगवान श्री राम को वापस अयोध्या लाने की बात कहते हैं हुए आज्ञा लेते हैं। भरत शत्रुघ्न पूरे परिवार तथा सेवा के साथ वन में श्री राम से चित्रकूट में मिलते हैं। तथा वापस अयोध्या चलकर राज्य संभालने का आग्रह भी करते हैं।

 जिससे श्री राम वापस अयोध्या चलने से मना कर देते हैं। तब भरत श्री राम के चरण पादुका मांगते हैं। की जिससे मैं चरण पादुका राज गद्दी पर रखकर राज चला सकूंगा। श्री राम भरत से 14 वर्ष पूर्ण होने पर अयोध्या वापस आने का कहते हैं। वन में श्री राम लखन सीता को सूर्पनखा मिलती है। वह दोनों राजकुमारों के विवाह करना चाहती है। 

सूर्पनखा बार-बार राम लखन को प्रेम बनाकर विवाह करने पर अड़ी रहती है। जिससे लखन क्रोधित हो जाते हैं। और सूर्पनखा की नाक काट देते हैं। सूर्पनखा अपने भाई खड दुशन के पास में जाकर पूरी पीड़ा बताती है। जिससे खड दुशन क्रोधित हो जाते हैं। और सेना के साथ राम लखन के पास पहुंच जाते हैं और वहां युद्ध में खड़ादूषण मारे जाते हैं। सूर्पनखा अपने भाई की घटना भाई रावण को बताती है। रावण करता है खड दूशन को भगवान के अलावा कोई मार नहीं सकता।यदि वह भगवान हुए तो मैं हठ पूर्वक बैर करके उनके लोग को प्राप्त हो जाऊंगा ।नहीं तो वहां मेरे हाथों मारे जाएंगे।

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